एक request है तुमसे कि...
अब जो ये lockdown की वजह से
हवाओ में घुला जहर खत्म हो रहा है , तुम फिर से इन हवाओं में जहर मत घोलना
ये जो नदियां फिर से स्वच्छ, निर्मल हो, लहराती ,बलकाती बह रही है , तुम फिर से इसे दूषित मर करना
ये जो बेजुबाँ पंछी आज़ादी से चहचहा रहे है
आसमाँ को पंखों तले माप रहे है , तुम फिर से अब इनकी आज़ादी छीन इन्हें तंग मत करना
ये जो बेजुबाँ जंगली जानवर अरसो बाद खुश है , तुम फिर से इन्हें मत मारना
ये जो प्रकृति में फिर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है , ये जो फिर से प्रकृति में रौनक आई है , तुम फिर इस रौनक को मत छीन लेना ।
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