शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

मुझे एक नया दौर दिखा

मुझे एक नया दौर दिखा ....

जहाँ मानते नारियों को देवी का स्वरूप
जहाँ होता नारियों का आदर सत्कार

जहाँ के पुरुष रहते मान मर्यादा में ,तो
जहाँ की नारियां भी थी मर्यादित

जहाँ पुरुष पर नारी को छूने को पाप समझते
तो
जहाँ की नारियां भी पर पुरुष के स्वप्नों को अधर्म मानती

जहाँ ना होता स्त्री-पुरुष के मध्य कोई भेदभाव
और ना होती स्त्रियों की कोई क्षति

जहाँ ना सुनाई देती कोई खबर नारियो के साथ दुर्व्यवहार की
जहाँ की नारियां थी सबसे सुरक्षित ,देख उस दौर सब हो गए अचंभित

एक ऐसा दौर देखा मैंने.... जो था नारियो औऱ
पुरुषो का स्वर्ण काल

मग़र.... नींद से मैं जाग गया ,सपन्न मेरा टूट गया और इस दौर में वापस आ गिरा
हाथ में ले अखबार  स्त्रियों के साथ हुए बलात्कार की एक और नई खबर फिर से पढ़ 
उस नए दौर को सोचने लगा ।


-राहुल दवे
(Rk के अल्फाज)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लोकतंत्र को खतरा ।

लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के  भोग विलास में डूबे नेताओ से  है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...