शनिवार, 18 मई 2019

A letter for relatives

My dear relatives

अगर मैं किसी लड़की के साथ photo click करके कहीं upload करता हूं इसका ये मतलब नही की आप उस फ़ोटो को दूसरों को pass out करके गलत अपवाह फैलाकर बदनाम करने की कोशिश करें

इस दुनिया में दोस्ती नाम की भी कोई चीज होती है
या हो सकता है जिसके साथ फोटो लिया वो बहन जैसी हो

अपने दिमाग की गन्द अपने पास रखे... सबमें फैलाकर अपनी गिरी हुई सोच को प्रदर्शित नही करे

वरना...इसका ये मतलब भी निकलता है कि जब कभी आपकी बहन और बेटी अपने ही भाई या रिश्तेदार से बात कर रही होती है तो आप उनके बीच नाजायज रिश्ता मानते हो

औऱ आशा है आपको आपकी गिरी हुई सोच और औकात दिखाने की जरूरत ना आन पड़े

धन्यवाद !!!🙏

सोमवार, 13 मई 2019

पहली मुलाकात औऱ बारिश

वो पहली मुलाकात थी....हमारी

आसमां ने भी बादल ओढ़ लिए थे
ठंडी हवाओं के झोंके भी चल रहे थे

तभी....वो आई !!

हवाओ से उसकी झुल्फे उड़ रही थी
औऱ उनकी झुल्फों को सँवारते वो औऱ भी खूबसूरत सी लग रही थी

बादलों से बिजली कड़काने की आवाज के साथ
वो पहली बारिश की बूंद ज्यो ही उसके माथे पर गिरी
ऐसा लगा कोई....कोहिनूर का हीरा उसके ताज पर लगा हो

वो बूंद माथे से सरक.... उसके होठो पर  आ रुकी
औऱ उसके गुलाबी होठो को...उसने औऱ भी हसीन बना दिया था

अभी उसके होठो पर ही नजर थी....की उसने कहा क्या देख रहे हो

मैंने जवाब दिया . ये जो तेरे गुलाब की पंखुड़ियों पर बारिश की बूंद है बस उसे

वो मुस्कुरा गयी....औऱ उसके मुस्कुराते ही जैसे बादलो  को भी उसकी मुस्कुराहट का इंतजार था
वो भी जम कर बरसने लगे

वो...बारिश में भीगने का शौक था उसे औऱ मुझे भी

मैंने उसका हाथ पकड़ा और बारिश में भीगने चल पड़े

बारिश में भीगती ...वो क्या कयामत ढा रही थी

मैंने उसके हाथों को चूम उसे कहाँ.... मेरी जिंदगी के सूखे में तुम क्या इस बारिश की तरह जिंदगी को खुशहाल बनाओगी

औऱ उसने शर्मा कर कहाँ.... मैं इस दुनिया मे आई भी इसीलिए हुँ ।

पहली मुलाकात औऱ बारिश

वो पहली मुलाकात थी....हमारी

आसमां ने भी बादल ओढ़ लिए थे
ठंडी हवाओं के झोंके भी चल रहे थे

तभी....वो आई !!

हवाओ से उसकी झुल्फे उड़ रही थी
औऱ उनकी झुल्फों को सँवारते वो औऱ भी खूबसूरत सी लग रही थी

बादलों से बिजली कड़काने की आवाज के साथ
वो पहली बारिश की बूंद ज्यो ही उसके माथे पर गिरी
ऐसा लगा कोई....कोहिनूर का हीरा उसके ताज पर लगा हो

वो बूंद माथे से सरक.... उसके होठो पर  आ रुकी
औऱ उसके गुलाबी होठो को...उसने औऱ भी हसीन बना दिया था

अभी उसके होठो पर ही नजर थी....की उसने कहा क्या देख रहे हो

मैंने जवाब दिया . ये जो तेरे गुलाब की पंखुड़ियों पर बारिश की बूंद है बस उसे

वो मुस्कुरा गयी....औऱ उसके मुस्कुराते ही जैसे बादलो  को भी उसकी मुस्कुराहट का इंतजार था
वो भी जम कर बरसने लगे

वो...बारिश में भीगने का शौक था उसे औऱ मुझे भी

मैंने उसका हाथ पकड़ा और बारिश में भीगने चल पड़े

बारिश में भीगती ...वो क्या कयामत ढा रही थी

मैंने उसके हाथों को चूम उसे कहाँ.... मेरी जिंदगी के सूखे में तुम क्या इस बारिश की तरह जिंदगी को खुशहाल बनाओगी

औऱ उसने शर्मा कर कहाँ.... मैं इस दुनिया मे आई भी इसीलिए हुँ ।

शुक्रवार, 3 मई 2019

मत नोच मेरे जिस्म को

मत नोच मेरे जिस्म को
यूँ जानवर की तरह ऐ -जालिम

बस छोटी सी ही तो स्कर्ट थी मेरी
सोच तो काफी बड़ी थी मेरी

नियत तेरी खोटी थी , सोच तेरी छोटी थी

मैंने ना कोई दिया तुझे न्यौता था
फिर भी...क्यो जिस्म को लूटने आ तुला तू

तेरी भी कोई बहन होगी , होगी कोई माँ तेरे घर पर

मै भी हुँ तेरे बहन जैसी, मुझको भी तेरी बहन मान लेता

ऐ-ज़ालिम छोड़ दे मुझे मत नोच जिस्म मेरा यू बेदर्दी की तरह

मत पोछ कालिक मेरे माँ-बाप पर ,  यू जीते जी मत बर्बाद कर परिवार मेरा

ऐ-जालिम मत नोच जिस्म मेरा
बस छोटी ही तो स्कर्ट थी मेरी

गुरुवार, 2 मई 2019

ऐ-मेरे समाज

घूंघटे तक सीमित ना रख
औरतों को ऐ- मेरे समाज

पैरों में बांधी इन समाज की
बेड़िया को तो खोल  दे एक बार

फिर देख....

अपनी उड़ान से आसमां
का कद ना झुका दे  ये औरते

तुम्हारे पुरुषों को....हर दौड़ में
पीछे ना छोड़ दे  ये औरते

तो ....तेरे कदमो में जिंदगी गुजार देंगे
ये औरते
ऐ-मेरे समाज

लोकतंत्र को खतरा ।

लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के  भोग विलास में डूबे नेताओ से  है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...