शुक्रवार, 3 मई 2019

मत नोच मेरे जिस्म को

मत नोच मेरे जिस्म को
यूँ जानवर की तरह ऐ -जालिम

बस छोटी सी ही तो स्कर्ट थी मेरी
सोच तो काफी बड़ी थी मेरी

नियत तेरी खोटी थी , सोच तेरी छोटी थी

मैंने ना कोई दिया तुझे न्यौता था
फिर भी...क्यो जिस्म को लूटने आ तुला तू

तेरी भी कोई बहन होगी , होगी कोई माँ तेरे घर पर

मै भी हुँ तेरे बहन जैसी, मुझको भी तेरी बहन मान लेता

ऐ-ज़ालिम छोड़ दे मुझे मत नोच जिस्म मेरा यू बेदर्दी की तरह

मत पोछ कालिक मेरे माँ-बाप पर ,  यू जीते जी मत बर्बाद कर परिवार मेरा

ऐ-जालिम मत नोच जिस्म मेरा
बस छोटी ही तो स्कर्ट थी मेरी

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