गुरुवार, 2 मई 2019

ऐ-मेरे समाज

घूंघटे तक सीमित ना रख
औरतों को ऐ- मेरे समाज

पैरों में बांधी इन समाज की
बेड़िया को तो खोल  दे एक बार

फिर देख....

अपनी उड़ान से आसमां
का कद ना झुका दे  ये औरते

तुम्हारे पुरुषों को....हर दौड़ में
पीछे ना छोड़ दे  ये औरते

तो ....तेरे कदमो में जिंदगी गुजार देंगे
ये औरते
ऐ-मेरे समाज

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