रविवार, 21 जुलाई 2019

गलतफहमियां😊

गलतफहमियां वक़्त रहते आमने -सामने बैठ
सुलझा देनी चाहिये

गुस्से औऱ अपने घमंड में ही रहोगे औऱ
अपनी गलती का अंदाजा लगाए बिना
सामने वाले को बेवजह  तकलीफे दोगे

एक दिन....महोब्बत कितनी ही गहरी क्यो ना
हो दुरिया बढ़ ही जाती है

अपने विवेक का सही उपयोग कर सिर्फ हम खुद ही अपने रिश्ते को बिखेरने से बचा सकते है

औऱ कोई नही बचा सकता

और बाद में पछतावा हो ऐसा गुनाह खुद से करना ही नही😊

Breakup 😎

महोब्बत बेसुमार थी उससे औऱ शायद उसको मुझसे
मगर शक को वो रोक ना सकी
औऱ बेवजह शक कर बैठी

बहुत समझाया उसे की मेरी कोई ख़ता नही
कुछ किया ही नही मैंने
बस तुम्हे गलतफहमी हो रही है

पर वो मानी नही....

याद है 40-50 बार कॉल करने की कोशिश की थी
मग़र ब्लॉक किया था उसने
उसको समझाया कि आकर बैठ कर सब सुलझा लेते है
कहि रिश्ते में दूरियां ना हो

दो पल की नाराजगी जिंदगी भर की दूरियां बना लेगी

मेरी तुझसे शादी के अरमान बिखेर जाएंगे
जो देखे थे सपने मैंने हम दोनों के लिए
वो टूट से जाएंगे

मग़र वो मानी नही

मैंने अपनी सेल्फ रेस्पेक्ट को side में कर दिया
औऱ मेरी कुछ भी
मतलब कुछ भी  गलती नही थी फिर भी माफिया मांग रहा था

कसमे खाई मैने खुद की वो मानी नही

मैंने मेरे परिवार की कसमें खाई मग़र उसने ये कहकर दरकिनार कर दिया कि मुझे कुछ मतलब नही तू किसकी कसम खाता है

औऱ मुझे झटका सा लगा

मतलब उस लड़की के लिए परिवार की कसमे खा रहा हु
जबकि मेरी कोई गलती तक नही थी कुछ

मेरे मन मे ख्याल आया ये लड़की इतनी भी खास नही की अब परिवार से बढ़कर हो जाये

मैंने भी सेल्फ रेस्पेक्ट को याद किया
परिवार को याद किया .....और उसे
*******दी (गाली ) 
और ब्लॉक लिस्ट में डाल उसे छोड़ दिया

शुरू में याद सताती थी बहुत उसकी मग़र उसकी वो बात याद कर की उसने मेरे परिवार की कसम तक को दरकिनार कर दिया
उससे नफरत बढ़ती गयी

उसने बेवजह छोड़ दिया ये सोच उसको नजरअंदाज करता गया

औऱ स्वाभिमान को याद कर उसे भूलता गया

मग़र हाँ महोब्बत आज भी उससे उसी तरह करता हूं
मग़र अब उसकी चाहत रही नही
😊😉

बुधवार, 10 जुलाई 2019

आतँकवादी

आतँकवादी सिर्फ पाकिस्तान से नही
आते है
वहाँ से आते ही है साथ ही में
कुछ आतँकवादी हमारे मुल्क में भी है

जो हर रोज सेना पर पत्थरबाजी करते है
जो सोशल साइट पर हमारे मुल्क औऱ हमारे मुल्क की सेना पर अभद्र टिप्पणी करते है

जो isis औऱ पाकिस्तान के  झंडे फहराते है

औऱ मक्कारी की बात ये है कि हमारे देश के कुछ नेता , कुछ गद्दार उन लोगो के समर्थन में खड़े हो जाते है

यहाँ तक कि आम लोग भी धर्म का नाम लेकर उनका समर्थन करते है
उन्हें मासूम , भटके हुए नोजवान कहकर उनकी तरफदारी करते है
बेरोजगारी का मारा बताते है

जबकि हकीकत यह है कि यहाँ पर phd धारक भी वोही गतिविधि करते है जो लोग करते है जिन्हें ये बेरोजगार बताते है

हकिकत ये है कि ना वो बेरोजगारी , या भटके हुए है
बल्कि उनका दिमाग आतंकवादियों से मेल खाता है
जो हमारे लिए अच्छा नही है

जो लोग धर्म का नाम लेकर ऐसे आतँकवादी सोच वालो का समर्थन करते है
उन्हें दबाने औऱ उन पर जुल्म करने का नाम लेते है

असल में वो लोग भी ..इसी सोच के मारे है

इसका इलाज उन लोगो को सही रास्ता दिखाने के साथ ही उनका सफाया भी है

लोकतंत्र को खतरा ।

लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के  भोग विलास में डूबे नेताओ से  है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...