महोब्बत बेसुमार थी उससे औऱ शायद उसको मुझसे
मगर शक को वो रोक ना सकी
औऱ बेवजह शक कर बैठी
बहुत समझाया उसे की मेरी कोई ख़ता नही
कुछ किया ही नही मैंने
बस तुम्हे गलतफहमी हो रही है
पर वो मानी नही....
याद है 40-50 बार कॉल करने की कोशिश की थी
मग़र ब्लॉक किया था उसने
उसको समझाया कि आकर बैठ कर सब सुलझा लेते है
कहि रिश्ते में दूरियां ना हो
दो पल की नाराजगी जिंदगी भर की दूरियां बना लेगी
मेरी तुझसे शादी के अरमान बिखेर जाएंगे
जो देखे थे सपने मैंने हम दोनों के लिए
वो टूट से जाएंगे
मग़र वो मानी नही
मैंने अपनी सेल्फ रेस्पेक्ट को side में कर दिया
औऱ मेरी कुछ भी
मतलब कुछ भी गलती नही थी फिर भी माफिया मांग रहा था
कसमे खाई मैने खुद की वो मानी नही
मैंने मेरे परिवार की कसमें खाई मग़र उसने ये कहकर दरकिनार कर दिया कि मुझे कुछ मतलब नही तू किसकी कसम खाता है
औऱ मुझे झटका सा लगा
मतलब उस लड़की के लिए परिवार की कसमे खा रहा हु
जबकि मेरी कोई गलती तक नही थी कुछ
मेरे मन मे ख्याल आया ये लड़की इतनी भी खास नही की अब परिवार से बढ़कर हो जाये
मैंने भी सेल्फ रेस्पेक्ट को याद किया
परिवार को याद किया .....और उसे
*******दी (गाली )
और ब्लॉक लिस्ट में डाल उसे छोड़ दिया
शुरू में याद सताती थी बहुत उसकी मग़र उसकी वो बात याद कर की उसने मेरे परिवार की कसम तक को दरकिनार कर दिया
उससे नफरत बढ़ती गयी
उसने बेवजह छोड़ दिया ये सोच उसको नजरअंदाज करता गया
औऱ स्वाभिमान को याद कर उसे भूलता गया
मग़र हाँ महोब्बत आज भी उससे उसी तरह करता हूं
मग़र अब उसकी चाहत रही नही
😊😉