शनिवार, 28 सितंबर 2019

महोब्बत निकल पहली फुर्सत में

वो हुआ यूं कि हम दोनों की ग़लतियो की वजह से हम थोड़े  दूर हो गए
मगर उनकी नजर में सारी गलतियां मेरी ही थी ।
मै भी उनके बगैर रह तो सकता नही ...तो
मैंने उनके सामने हाथ जोड़े , माफी मांगी और वो सब कुछ किया जो कभी करने को मै खुद को इजाजत नही देता ।

खैर फिर भी वो मानी नही...औऱ  शायद वो मानना चाहती ही नही थी ।

2-3 दिन हुए और एका एक मुझे उसकी जोरो से याद सताने लगी
और याद इस कदर सता रही थी कि ना मै खाना खा रहा था और ना ही किसी से बात
बस एकेले में बैठा  रहता और आंखों से आंसू निकल रहे थे

मगर ना उसको किसी से फर्क पड़ना था और ना ही उसे कभी फर्क पड़ेगा

2 दिन भूखे रहने के बाद

यह समझ आया कि ...उसे इस बात से भी अब फर्क नही पड़ेगा कि मै मर जाऊ
अगर लाश भी देखे मेरी वो तो उसे कुछ फर्क नही पड़ेगा

तो ...अब सब कुछ छोड़
पहले जमकर खाना खाने की सोची औऱ 12-14 घण्टो की कुम्भकरण वाली नींद ली

और एक बात बोली........

ऐ महोब्बत चल निकल ल*ड़ी पहली फुर्सत में
कोई काम नही तेरा यहाँ ।

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

In love

In Love

She never understand your pain
Your feeling ,your love for her,
Your sacrifices , your emotions
Even your are in depression but she never show little bit caring
For you.

And we guya always say sorry without any mistakes
We are in pain but we always think about her happiness
We do everything for her

But at the end.... Your love
Your feeling is nothing for her.

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

शायद औऱ सिर्फ शायद

जी कुछ अप्रैल का महीना था और रात बड़ी हसीं सी थी
गर्मी थी थोड़ी बहुत मग़र  उसके जितना गर्म कोई ना

रात के 9.30 बजे थे उस वक़्त जब वो मेरे कमरे में आई थी
हाथ मे उसके टिप्पिन था ।

दोनों ने साथ मे खाना खाया ...कभी वो मुझको तो कभी मै उसको निवाला खिला रहे थे

खाना हुआ और अब थोड़ी बाते शुरु हुई

एक दूजे के बारे में ,कैसे मुझे उसके बिना सब खाली सा लगता है
आखिर क्यों उसे जबतक दिन में 4-5 बार कॉल ना करु तो कुछ अच्छा नही लगता

उसके बच्चो जैसी हरकते मुझे कितनी पसन्द है

ये सब एक दूजे से बाते हो रही थी ।

तभी उसने कुछ रोमांटिक सा गाना लगाया और मौसम हसीं कर दिया
उसके दिल मे शायद महोब्बत की आग सी जल रही थी

वो मेरे करीब आई और मेरे होठो को उसके होठो से लगा दिया

मेरे लिए कुछ ऐसा एहसास था कि मै बया नही कर सकता

धीरे धीरे महोब्बत में हमने हदे पार की
औऱ जिस्म को बेपर्दा कर दिया

वो मुझसे जैसे कोई नागिन हो , लिपट सी गई

मग़र मैंने खुद पर काबू किया , महोब्बत में सही गलत को सोचा
औऱ सब कुछ एक दूजे को बाहों में भरने तक ही रखा
मैंने हद पार नही करी ।

फिर कुछ दिन हुए और उसे रोज नए बहाने ढूढ़ने पड़ रहे थे मुझे छोड़ देने को

औऱ एक दिन कुछ झूठी बात जबरन मुझपर थोप वो चली गयी ।

बहुत सोचा समझा ...मग़र क्या ख़ता थी मेरी कुछ पता नही चला ।

शायद उसे महोब्बत करने वाले पसन्द नही थे
शायद उसे जिस्मो को नोच खाने वाले लोग पसन्द थे

शायद उसे...मुझसे महोब्बत थी ही नही या शायद थी भी तो बस बिस्तर तक

या शायद ....उसे कोई और पसन्द था
या शायद उसे किसी का होना गवारा नही था

शायद ...शायद औऱ सिर्फ शायद ।

शनिवार, 14 सितंबर 2019

Me to myself

Front of mirror

(Me to myself ):-

Hey you...yes you
Today i'm promising to you  -

"i will  never hurt you ,
i will never compare you to others ,

&

i will always love you 
and
No one will come between you and  your self respect ".

रविवार, 8 सितंबर 2019

लोकतंत्र को खतरा ।

लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के  भोग विलास में डूबे नेताओ से  है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...