शनिवार, 28 सितंबर 2019

महोब्बत निकल पहली फुर्सत में

वो हुआ यूं कि हम दोनों की ग़लतियो की वजह से हम थोड़े  दूर हो गए
मगर उनकी नजर में सारी गलतियां मेरी ही थी ।
मै भी उनके बगैर रह तो सकता नही ...तो
मैंने उनके सामने हाथ जोड़े , माफी मांगी और वो सब कुछ किया जो कभी करने को मै खुद को इजाजत नही देता ।

खैर फिर भी वो मानी नही...औऱ  शायद वो मानना चाहती ही नही थी ।

2-3 दिन हुए और एका एक मुझे उसकी जोरो से याद सताने लगी
और याद इस कदर सता रही थी कि ना मै खाना खा रहा था और ना ही किसी से बात
बस एकेले में बैठा  रहता और आंखों से आंसू निकल रहे थे

मगर ना उसको किसी से फर्क पड़ना था और ना ही उसे कभी फर्क पड़ेगा

2 दिन भूखे रहने के बाद

यह समझ आया कि ...उसे इस बात से भी अब फर्क नही पड़ेगा कि मै मर जाऊ
अगर लाश भी देखे मेरी वो तो उसे कुछ फर्क नही पड़ेगा

तो ...अब सब कुछ छोड़
पहले जमकर खाना खाने की सोची औऱ 12-14 घण्टो की कुम्भकरण वाली नींद ली

और एक बात बोली........

ऐ महोब्बत चल निकल ल*ड़ी पहली फुर्सत में
कोई काम नही तेरा यहाँ ।

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