शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

किसी ने कहाँ था ।

हाँ अब दोस्ती नाम की चीज से वास्ता नही मेरा
सबसे दूर-दूर ही रहता हूं

क्योकि किसी ने कहाँ था  "तू तो दोस्ती के लायक भी नही "

हाँ अब चुपचाप सा ही कोने में बैठा रहता हूं ,देखकर भी उसको अब नजरअंदाज करता हु
क्योकि किसी ने कहाँ था " मुझे तेरे मुँह भी नही लगना"

हाँ अब सबसे दूर कहि एकेले में चला जाता हूं
बिन रास्तो और बिन मंजिल के ही
खुद को अंधेरे से भरे कमरे में कैद कर खुद को ही सताता हुँ मै अब 
क्योकि किसी ने कहाँ था "भाड़ में जा तू"

हाँ अब किसी को कोई सफाई , कोई समझाईश नही करता मै अब
कोई कह दे तूने गलती की तो हाँ चुपचाप बिन गलत होकर भी खुद को गलत बता माफी मांग चुप हो जाता हूं मैं अब

क्योकि किसी ने कहा था  " बोला ना मैंने मुझे कोई फर्क नही पड़ता तेरी इन सब बातों से तुझे समझ नही आता क्या "

अब मै किसी एक ही बात को बार बार दोहरा खुद को सही साबित नही करता मै
ना ही मेरी सच्चाई को उजागर करता हूँ , मै अब चुप्पी ही साधे रहता हूं 
क्योकि किसी ने कहा था " क्यो एक ही बात बार बार बके जा रहा है "



हाँ बहुत तकलीफे हुई किसी ने जब ये सब बोला था , आंखे भी नम हो गयी थी
मग़र मुझमे बैठा मेरा स्वाभिमान ही था एक वो जिसने मेरी नम आंखों को पोछ , 
महोब्बत में खुद को  गिरा देने के बावजूद मुझको उठा मुझे
नऐ सवेरे की नई सूरज की  किरण सा बना
मुझे नई शरुआत को पंख लगा दिए ।


हाँ लेकिन अब भी....वो सब नही करता में

क्योकि ....किसी ने कहा था ।



शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

उसकी याद में





1. In 2019

In 2019


I lost my love
I lost myself
I lost my respect for myself
I lost my 1st bestfriend of my
College
I lost my first ever love.
I lost my happiness

And 
In return i got only
Depression.



2.   2019


2019
शुरू में इसने सारी खुशियां लौटा दी थी
मेरा प्यार फिर से मिल चुका था
घर मे भी सब ठीक चल रहा था ।

मगर ...2019 को ये मंजूर थोड़ी था
बस थोड़ी सी खुशियां देकर गमो का पहाड़ रख दिया मुझ पर इसने ।

May महीने से बर्बादी शुरू की थी इसने
सबसे पहले मेरा प्यार जिससे मुझे बेइंतहा महोब्बत है ,उसको छिन्न लिया

फिर उस प्यार की याद में depression 
को face किया

फिर घर की हालत खराब हुई और मेरी
Health भी ।

वो सब चीजें एक साथ दिखा दी जिसको सोचकर ही रूह कांप जाती है मेरी ।

2019 ...बहुत कुछ गम देके गया है तू और अभी भी दे रहा है गम ही गम ।।



3. फिर से वही चीज दोहराई



आज फिर से वही चीज दोहराई मैंने ।

हर रोज की तरह आज फिर से 
फ़ोन उठा उसके नम्बर निकाल
उसको कॉल करने की खूब हिम्मत जुटाई मैंने

मगर हर रोज की दफा इस बार भी
डर के मारे फिर से फोन साइड में रख

किसी कोने में एकेले बैठ फिर से उसे इतना
याद किया कि पलके भीग गयी। 

4. ऐसे कैसे भूल जाऊँ उसे


ऐसे कैसे भूल जाऊ यार !!!


आखिरवो ही तो मेरी पहली 
महोब्बत है 
आखिर वो ही तो पहली है जिसमे अपनी
दुनिया नजर आती है
आखिर वो ही तो पहली है जिसे कभी में
खोना नही चाहता ।।

लोकतंत्र को खतरा ।

लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के  भोग विलास में डूबे नेताओ से  है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...