बरसात का माहौल सा बना हुआ
था
हवाये रुक सी गयी थी
आसमाँ में काले बादलों ने चादर
ओढ़ सी ली थी
बिजली कोंद रही थी
मै भी पागल सा बिन कुछ सोचे - समझे
बाहर घूमने चल पड़ा
घर से दूर बीच रास्ते मे पहुँचा ही था
की आसमाँ में बादलों की तेज गर्जन से ही
तेज बारिश शुरू हो गयी
मग़र.... मेरे बदन पर बरसात की एक बूंद तक ना गिरी
मै सोच में पड़ गया....औऱ ऊपर देखा तो
किसी ने छाते के छाए में मुझे महफूज़ सा रखा था
"गोरे-गोरे हाथ और हाथों में रंग-बिरंगी चूड़ियां
लाल रंग के सलवार में ,
गोरा सा मुखडा जैसे चाँद को रोशनी यही से मिलती है
माथे पर लाल बिंदी खूबसूरती में चार-चांद लगाती सी "
उन्होंने कहाँ- आप भीग जाओगे जरा छाते के नीचे ठीक से आ जाइए
उनकी खूबसूरती देख मुँह में हजारों अल्फ़ाज़ होते हुए भी जुबां से कुछ निकल नही रहा था
मैने फिर भी कहाँ कि - जी , आपका धन्यवाद
मैं सर झुकाए बस उनके छाते के नीचे उनके साथ खड़ा था
वो मुझे बोली- आप शर्मा क्यों रहे है मै आपको खा नही जाऊंगी
मैंने कहा- जी ऐसा नही है
फिर मैंने कुछ हिम्मत सी जुटाई और बातें शूरू हुई
इतेफाक की बात ये थी कि मै उनको जानता तक नही था
औऱ मेरी कोई बात उनसे छिपी नही थी
मै हैरान सा था कि वो मुझे इतने अच्छे से जानती कैसे है
फिर उन्होंने ही बताया कि " आपको मै कई दिन से देख रही थी
कि - '"आप कैसे बच्चो की तरह की हरकतें करते है
कैसे दोस्तो सँग हँसते रहते है
कैसे जब उदास होते है तो नाराज बच्चे की तरह कहि शांत जगह बैठ जाते है ''
औऱ भी बहुत कुछ है जो बस आपको करते देख मुझे देखते रहने का दिल करता है "
मै खामोश सा हो गया और शर्म से कान सुन्न से हो गए
"""""छाते के नीचे आधी भीगती वो औऱ आधा भीगता मै
पता नही कब एक दूजे की महोब्बत में पूरे भीग गए कुछ पता ही नही चला """"
दोनों एक दूजे को ही निहार रहे थे कि अचानक हवा के तेज झोंके ने छाते को उड़ा दिया
औऱ हम दोनों भीग गए
अभी भीगे ही थे कि बिजली कड़कड़ाने की आवाज से वो डरी औऱ सीने से आ लिपटी
मासूम सी बच्ची की तरह उसने मुझे कस कर झकड रखा था जैसे मुझे अनन्त काल तक छोड़ना नही है
मैने भी उसे कस कर सीने से लगा दिया जैसे आज बरसो बिछड़े प्रेमी मिल रहे हो
औऱ औऱ..... उसने धीरे से अपने लबो को मेरे लबो के करीब ला दिया ,लबो के मिलन एक साथ ही
हम एक दूजे में खो गए
बरसात औऱ महोब्बत दोनों में हम भीग
रहे थे💓💓💓💓💓
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