मुझे पता है मै कैसा हु , तुमसे राय नही मांगता मै , मेरा दाता सब जानता है मेरे बारे में,
तुम मुझे थोड़ा अकड़ू , थोड़ा सा घमंडी
थोड़ा सा बत्तमीज औऱ थोड़ा मतलबी कह सकते हो
मगर तुम बस ये सब कह सकते हो
क्योकि तुम मुझे मेरे दाता औऱ मुझसे अच्छा नही जान सकते
हाँ कभी- कभी शायद सबको खुश रखने के चक्कर किसी को उदास कर देता हूं
पर उसमे मेरा दोष नही होता
भले तुम लाख इल्जाम लगाओ कि मै बुरा हु
पर ये मेरा दाता जानता मै कैसा हु
सबको खुश रखने की कोशिश करता , मजाकिया किस्म का अंदाज लिए,
हां कभी कभार बड़ बोला
पीठ पीछे ना बोल , बिना अंजाम की फिक्र के मुंह पर बोल देने वाला
सबकी मदद कर अंत मे उन्ही लोगो से hurt हो जाने वाला
इंसान हूं मैं,
हां फिर भी बुरा हु अगर में तुम्हारी नजरो में तो मुझे उसकी फिक्र नही
मेरा दाता जानता है मै कैसा हु, मेरा अंदाज ऐ जिन्दगी कैसा है
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