गुरुवार, 21 मार्च 2019

Chal pada hu

मंजिल का कुछ अता पता नही
फिर भी
चल पड़ा हूँ ....राह में

छोप कर अपने जीवन की डोर उस
मालिक के हाथ मे
चल पड़ा हुँ ....राह में

कब , कैसे औऱ किस वक़्त क्या होगा
कुछ पता नही
फिर भी
चल पड़ा हु.....राह में

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