बैसाखियों की जरूरत जिसे,
सफर में कहाँ तक साथ चले
राह कठिन डगर है,डर है,भय है
सफर में कहाँ तक साथ चले,
छूट जाएगा साथ बिन खबर पड़े
चलना अकेले, जीना अकेले
सफर में कोई कहाँ तक साथ चले ।।
कहानियां,कविताओं एवं शायरियों का संग्रह है यहाँ, मेरे जीवन के अनुभवों का वर्णन है यहां ।।
लोकतंत्र को खतरा इन अनपढ़,गवार, सत्ता के भोग विलास में डूबे नेताओ से है, ये खुद नियम ,कानून बनाते है और खुद तोड़ देते है, CORONA की सख्ती से...
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